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इस तरह की ठगी में जालसाज पीड़ित पर तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाते हैं। वे तत्काल फंड ट्रांसफर, इनवॉयस का भुगतान या बैंक खाते की जानकारी बदलने जैसे संदेश भेज सकते हैं। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी प्रोफाइल, नाम, लोगो और ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे होती है यह ठगी?
ठग किसी वरिष्ठ अधिकारी या परिचित व्यक्ति की पहचान बनाकर तुरंत भुगतान करने का अनुरोध भेजते हैं।
इसके बाद वे लाभार्थी (Beneficiary) के बैंक खाते की जानकारी देते हैं और तुरंत कार्रवाई करने का दबाव डालते हैं।
पीड़ित अनुरोध को वास्तविक समझकर बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर कर देता है।
रकम मिलने के बाद ठग उसे तेजी से कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे पैसे की रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
ठगी से बचने के लिए क्या करें?
1. जल्दबाजी में भुगतान न करें
WhatsApp, ई-मेल, SMS या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर आए तत्काल भुगतान के अनुरोध को पहले सत्यापित करें। संबंधित व्यक्ति से उसके पहले से मौजूद और भरोसेमंद फोन नंबर पर सीधे संपर्क करें।
2. सिर्फ नाम और फोटो देखकर भरोसा न करें
ठग नाम, प्रोफाइल फोटो, लोगो और ई-मेल आईडी में हेरफेर करके किसी अधिकारी या परिचित की पहचान की नकल कर सकते हैं।
3. OTP, PIN और पासवर्ड शेयर न करें
किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड, PIN या गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
4. दबाव बनाने वाले संदेशों से सावधान रहें
अगर कोई संदेश डर, घबराहट या जल्दबाजी पैदा करके तुरंत लेन-देन करने के लिए कह रहा है तो सावधान हो जाएं।
5. बैंक खाते की जानकारी बदलने से पहले करें पुष्टि
अगर किसी व्यक्ति या कंपनी की ओर से लाभार्थी के बैंक खाते की जानकारी बदलने का अनुरोध मिले तो भुगतान करने से पहले किसी स्वतंत्र और भरोसेमंद माध्यम से इसकी पुष्टि जरूर करें।
याद रखें- रुकें, सत्यापित करें और फिर भुगतान करें
वित्तीय लेन-देन से जुड़े निर्देशों को सत्यापित करने में वरिष्ठ अधिकारी भी सहयोग करेंगे। कुछ मिनट की पुष्टि आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
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