
AI से बने कंटेंट की पहचान होगी आसान
सरकार के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना (SGI), जिसमें डीपफेक और AI-जनित कंटेंट शामिल हैं, से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया गया। नए प्रावधानों के तहत मध्यस्थों को AI-जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि कोई सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है और इसके जरिए धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग को रोकना है।
36 घंटे की जगह अब 3 घंटे में हटानी होगी गैरकानूनी सामग्री
नए नियमों में कंटेंट हटाने की समयसीमा को भी कम किया गया है। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं कुछ संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी कम की गई है।
डीपफेक बनाने और फैलाने पर भी नियम सख्त
आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों को ऐसी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी, जिसमें AI के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना, जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देना, निजता का उल्लंघन करना या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना शामिल है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म को रोकथाम और तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?
डीपफेक और AI से जुड़े अपराधों पर आईटी एक्ट, 2000 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। BNS की धारा 319 प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 336 में धोखाधड़ी के लिए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने जैसे कृत्य शामिल हैं। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह या रिपोर्ट के जरिए गलत सूचना और दुष्प्रचार फैलाने से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी बढ़ी जिम्मेदारी
भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत यूजर्स वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट का पता लगाने और उसके प्रसार को सीमित करने के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।
डीपफेक की शिकायत कहां करें?
सरकार के अनुसार, नागरिक National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और कंटेंट के दुरुपयोग की शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है और 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। अगर किसी मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी से समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता Grievance Appellate Committee (GAC) के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।
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सरकार ने डीपफेक डिटेक्शन पर भी बढ़ाया फोकस
IndiaAI Mission के तहत सुरक्षित और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देने के लिए 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें डीपफेक का पता लगाने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी पहलें इसमें शामिल हैं।
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